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श्लोक 9.19.26  |
श्रुत्वा गाथां देवयानी मेने प्रस्तोभमात्मन: ।
स्त्रीपुंसो: स्नेहवैक्लव्यात् परिहासमिवेरितम् ॥ २६ ॥ |
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| अनुवाद |
| जब देवयानी ने महाराज ययाति की बकरे-बकरी वाली कहानी सुनी, तो उन्हें समझ आया कि पति-पत्नी के मज़ाक के तौर पर बताई गई यह कहानी दरअसल उन्हें उनकी स्वाभाविक स्थिति से अवगत कराने के लिए कही गई थी। |
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| जब देवयानी ने महाराज ययाति की बकरे-बकरी वाली कहानी सुनी, तो उन्हें समझ आया कि पति-पत्नी के मज़ाक के तौर पर बताई गई यह कहानी दरअसल उन्हें उनकी स्वाभाविक स्थिति से अवगत कराने के लिए कही गई थी। |
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