किरात हुणाँध्र पुलिंद पुलकसा
आभीर शुम्भा यवनाः खसादयः
ये अन्ये च पापा यद-पाश्रयाश्रयाः
शुध्यंति तस्मै प्रभविष्णवे नमः
'किरात, हूण, आंध्र, पुलिंद, पुलकश, आभीर, शुम्भ, यवन और खस नस्लों और यहां तक कि पापपूर्ण कृत्यों के आदी अन्य लोगों को भी भगवान के भक्तों की शरण लेने से शुद्ध किया जा सकता है, क्योंकि वह सर्वोच्च शक्ति हैं। मैं उन्हें अपना विनम्र प्रणाम भेजता हूँ।' भगवान विष्णु इतने शक्तिशाली हैं कि यदि वह चाहें तो वह किसी को भी तुरंत मुक्त कर सकते हैं। और भगवान विष्णु, परमपुरुष भगवान कृष्ण, तुरंत प्रसन्न हो सकते हैं यदि हम उनके आदेश को स्वीकार करते हैं और उनके प्रति समर्पित हो जाते हैं, जैसा कि महाराज ययाति ने किया था। महाराज ययाति वासुदेव, कृष्ण की सेवा करने के लिए उत्सुक थे, और इसलिए जैसे ही उन्होंने भौतिक जीवन को त्यागने की इच्छा की, भगवान वासुदेव ने उनकी मदद की। इसलिए हमें भगवान के चरण कमलों में अपने आप को समर्पित करने में बहुत ईमानदार होना चाहिए। तब हम तुरंत कंडीशंड जीवन के सभी बंधनों से मुक्त हो सकते हैं। यह अगले श्लोक में स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया है।
