श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 19: राजा ययाति को मुक्ति-लाभ  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  9.19.2 
श‍ृणु भार्गव्यमूं गाथां मद्विधाचरितां भुवि ।
धीरा यस्यानुशोचन्ति वने ग्रामनिवासिन: ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
हे मेरी प्यारी पत्नी और शुक्राचार्य की पुत्री, इस दुनिया में कोई ऐसा था जो बिल्कुल मेरे जैसा था। कृपया मेरे द्वारा सुनाई जा रही उसकी जीवनगाथा सुनो। ऐसे गृहस्थ के जीवन के विषय में सुनकर वे लोग हमेशा पछताते हैं जिन्होंने गृहस्थ जीवन से वैराग्य ले लिया है।
 
हे मेरी प्यारी पत्नी और शुक्राचार्य की पुत्री, इस दुनिया में कोई ऐसा था जो बिल्कुल मेरे जैसा था। कृपया मेरे द्वारा सुनाई जा रही उसकी जीवनगाथा सुनो। ऐसे गृहस्थ के जीवन के विषय में सुनकर वे लोग हमेशा पछताते हैं जिन्होंने गृहस्थ जीवन से वैराग्य ले लिया है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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