| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 9: मुक्ति » अध्याय 19: राजा ययाति को मुक्ति-लाभ » श्लोक 18 |
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| | | | श्लोक 9.19.18  | पूर्णं वर्षसहस्रं मे विषयान् सेवतोऽसकृत् ।
तथापि चानुसवनं तृष्णा तेषूपजायते ॥ १८ ॥ | | | | | | अनुवाद | | मैंने इन्द्रिय तृप्ति के भोगों का आनंद लेने में पूर्ण एक हजार वर्ष बिताए हैं, फिर भी ऐसे सुख-भोगों का उपभोग करने की मेरी इच्छा प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। | | | | मैंने इन्द्रिय तृप्ति के भोगों का आनंद लेने में पूर्ण एक हजार वर्ष बिताए हैं, फिर भी ऐसे सुख-भोगों का उपभोग करने की मेरी इच्छा प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। | | ✨ ai-generated | | |
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