Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 9.18.46: इसके बाद, राजा ययाति सात द्वीपों वाले संपूर्ण विश्व का शासक बन गया और उसने प्रजा पर पिता के समान शासन करना शुरू कर दिया। क्योंकि उसने अपने पुत्र की जवानी ले ली थी, इसलिए उसकी इंद्रियाँ पहले जैसी ही थीं और उसने मनचाहे भौतिक सुखों का भरपूर आनंद लिया।   |   bhagavat अध्याय 9.18: राजा ययाति को यौवन की पुन:प्राप्ति   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 18: राजा ययाति को यौवन की पुन:प्राप्ति  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  9.18.46 
सप्तद्वीपपति: सम्यक् पितृवत् पालयन् प्रजा: ।
यथोपजोषं विषयाञ्जुजुषेऽव्याहतेन्द्रिय: ॥ ४६ ॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद, राजा ययाति सात द्वीपों वाले संपूर्ण विश्व का शासक बन गया और उसने प्रजा पर पिता के समान शासन करना शुरू कर दिया। क्योंकि उसने अपने पुत्र की जवानी ले ली थी, इसलिए उसकी इंद्रियाँ पहले जैसी ही थीं और उसने मनचाहे भौतिक सुखों का भरपूर आनंद लिया।
 
Thereafter King Yayati became the ruler of the world consisting of seven islands and started ruling the subjects like a father. Since he had taken the youth of his son, his senses were intact and he enjoyed material pleasures to his heart's content.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)