Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.18.28: शुक्राचार्य के अनुरोध को सुनकर वृषपर्वा ने देवयानी की इच्छा पूरी करने की स्वीकृति दे दी, और उसके वचनों की प्रतीक्षा करने लगा। तत्पश्चात् देवयानी ने अपनी इच्छा इस प्रकार व्यक्त की, "जब भी मैं अपने पिता की आज्ञा से विवाह करूँ तो मेरी सहेली शर्मिष्ठा अपनी सहेलियों के साथ मेरी दासी के रूप में मेरे साथ जाए।" | bhagavat अध्याय 9.18: राजा ययाति को यौवन की पुन:प्राप्ति । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शुक्राचार्य के अनुरोध को सुनकर वृषपर्वा ने देवयानी की इच्छा पूरी करने की स्वीकृति दे दी, और उसके वचनों की प्रतीक्षा करने लगा। तत्पश्चात् देवयानी ने अपनी इच्छा इस प्रकार व्यक्त की, "जब भी मैं अपने पिता की आज्ञा से विवाह करूँ तो मेरी सहेली शर्मिष्ठा अपनी सहेलियों के साथ मेरी दासी के रूप में मेरे साथ जाए।"
Hearing Shukracharya's request, Vrishparva agreed to fulfill Devayani's wish and he started waiting for her words. Then Devayani expressed her wish in this way, "Whenever I get married with the permission of my father, then my friend Sharmishtha along with her friends should accompany me as my maids."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥