श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 18: राजा ययाति को यौवन की पुन:प्राप्ति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  9.18.19 
दत्त्वा स्वमुत्तरं वासस्तस्यै राजा विवाससे ।
गृहीत्वा पाणिना पाणिमुज्जहार दयापर: ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
देवयानी को कुएँ में नग्न देखकर राजा ययाति ने अपनी ऊपरी चादर उसे ढकने के लिए दे दी। उस पर दया करके उन्होंने अपना हाथ उसके हाथ में डाला और उसे बाहर निकाला।
 
Seeing Devayani naked in the well, King Yayati immediately gave her his upper garment. Being very kind to her, he took her hand and pulled her out.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)