श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 17: पुरूरवा के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  9.17.14 
पितर्युपरते पुत्रा याचमानाय नो ददु: ।
त्रिविष्टपं महेन्द्राय यज्ञभागान् समाददु: ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
रजी की मृत्यु के बाद, इंद्र ने रजी के पुत्रों से स्वर्गलोक वापस लौटाने की प्रार्थना की। हालाँकि, उन्होंने उसे वापस नहीं किया, लेकिन वे अनुष्ठानिक समारोहों में इंद्र का हिस्सा वापस करने के लिए सहमत हो गये।
 
After Raji's death, Indra requested Raji's sons to return the kingdom of heaven to him. But they did not return it, although they agreed to return Indra's sacrificial share.
तात्पर्य
राजी ने स्‍वर्गलोक को जीत लिया था। इस कारण जब इन्‍द्र, स्‍वरग का राजा, राजी के पुत्रों से इसको वापस लौटाने की भिक्षा माँगा, तो उन्‍होंने मुँह फेर लिया। क्‍योंकि उन्‍होंने स्‍वर्गलोक को इन्‍द्र से नहीं लिया था बल्कि इसको विरासत में अपने पिता से पाया था। वे इसको अपनी पैतृक संपत्ति मानते थे। तो वे इसको देवताओं को क्‍यों लौटाते
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)