श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 16: भगवान् परशुराम द्वारा विश्व के क्षत्रियों का विनाश  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  9.16.32 
यो रातो देवयजने देवैर्गाधिषु तापस: ।
देवरात इति ख्यात: शुन:शेफस्तु भार्गव: ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि शुन:शेफ का जन्म भृगु ऋषि के वंश में हुआ था, किन्तु आध्यात्मिक जीवन में वह बहुत आगे बढ़ा हुआ था, इस कारण यज्ञ में सम्बन्धित देवता उसकी रक्षा करते थे। फलस्वरूप वह देवरात के नाम से गाधि के वंशज के रूप में भी विख्यात हुआ।
 
Although Shunashef was born in the Bhargava clan, but due to his progress in spiritual life, the deities related to yajna protected him. As a result, he also became famous as a descendant of Gadhi by the name Devarat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)