श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 15: भगवान् का योद्धा अवतार, परशुराम  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  9.15.7 
इत्युक्तस्तन्मतं ज्ञात्वा गत: स वरुणान्तिकम् ।
आनीय दत्त्वा तानश्वानुपयेमे वराननाम् ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
जब राजा गाधि ने यह माँग की तो महर्षि ऋचीक समझ गए कि राजा के मन में क्या है। इसलिए वह वरुण देव के पास गए और वहाँ से गाधि द्वारा माँगे गए एक हज़ार घोड़े ले आए। इन घोड़ों को देने के बाद ऋषि ने राजा की सुंदर बेटी से विवाह कर लिया।
 
जब राजा गाधि ने यह माँग की तो महर्षि ऋचीक समझ गए कि राजा के मन में क्या है। इसलिए वह वरुण देव के पास गए और वहाँ से गाधि द्वारा माँगे गए एक हज़ार घोड़े ले आए। इन घोड़ों को देने के बाद ऋषि ने राजा की सुंदर बेटी से विवाह कर लिया।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas