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श्लोक 9.15.7  |
इत्युक्तस्तन्मतं ज्ञात्वा गत: स वरुणान्तिकम् ।
आनीय दत्त्वा तानश्वानुपयेमे वराननाम् ॥ ७ ॥ |
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| अनुवाद |
| जब राजा गाधि ने यह माँग की तो महर्षि ऋचीक समझ गए कि राजा के मन में क्या है। इसलिए वह वरुण देव के पास गए और वहाँ से गाधि द्वारा माँगे गए एक हज़ार घोड़े ले आए। इन घोड़ों को देने के बाद ऋषि ने राजा की सुंदर बेटी से विवाह कर लिया। |
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| जब राजा गाधि ने यह माँग की तो महर्षि ऋचीक समझ गए कि राजा के मन में क्या है। इसलिए वह वरुण देव के पास गए और वहाँ से गाधि द्वारा माँगे गए एक हज़ार घोड़े ले आए। इन घोड़ों को देने के बाद ऋषि ने राजा की सुंदर बेटी से विवाह कर लिया। |
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