| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 9: मुक्ति » अध्याय 15: भगवान् का योद्धा अवतार, परशुराम » श्लोक 38 |
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| | | | श्लोक 9.15.38  | राम राम महाबाहो भवान् पापमकारषीत् ।
अवधीन्नरदेवं यत्सर्वदेवमयं वृथा ॥ ३८ ॥ | | | | | | अनुवाद | | हे प्रतापी वीर, हे मेरे प्यारे पुत्र परशुराम, तूने राजा को व्यर्थ ही मार डाला है जो कि सभी देवताओं का साकार रूप माना जाता है। इस प्रकार तूने पाप किया है। | | | | हे प्रतापी वीर, हे मेरे प्यारे पुत्र परशुराम, तूने राजा को व्यर्थ ही मार डाला है जो कि सभी देवताओं का साकार रूप माना जाता है। इस प्रकार तूने पाप किया है। | | ✨ ai-generated | | |
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