श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 15: भगवान् का योद्धा अवतार, परशुराम  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  9.15.34 
पुन: स्वहस्तैरचलान् मृधेऽङ्‌घ्रिपा-
नुत्क्षिप्य वेगादभिधावतो युधि ।
भुजान् कुठारेण कठोरनेमिना
चिच्छेद राम: प्रसभं त्वहेरिव ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
जब कार्तवीर्यार्जुन के तीर टुकड़े-टुकड़े हो गए, तो उसने अपने हाथों से कई पेड़ों और पहाड़ों को उखाड़ लिया और वह फिर से भगवान परशुराम को मारने के लिए तेजी से उनकी ओर बढ़ा। किंतु परशुराम ने अपने फरसे से बहुत तेजी से कार्तवीर्यार्जुन की भुजाओं को काट दिया, ठीक वैसे ही जैसे कोई सांप के फन को काट लेता है।
 
जब कार्तवीर्यार्जुन के तीर टुकड़े-टुकड़े हो गए, तो उसने अपने हाथों से कई पेड़ों और पहाड़ों को उखाड़ लिया और वह फिर से भगवान परशुराम को मारने के लिए तेजी से उनकी ओर बढ़ा। किंतु परशुराम ने अपने फरसे से बहुत तेजी से कार्तवीर्यार्जुन की भुजाओं को काट दिया, ठीक वैसे ही जैसे कोई सांप के फन को काट लेता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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