श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 15: भगवान् का योद्धा अवतार, परशुराम  »  श्लोक 17-19
 
 
श्लोक  9.15.17-19 
श्रीबादरायणिरुवाच
हैहयानामधिपतिरर्जुन: क्षत्रियर्षभ: ।
दत्तं नारायणांशांशमाराध्य परिकर्मभि: ॥ १७ ॥
बाहून् दशशतं लेभे दुर्धर्षत्वमरातिषु ।
अव्याहतेन्द्रियौज:श्रीतेजोवीर्ययशोबलम् ॥ १८ ॥
योगेश्वरत्वमैश्वर्यं गुणा यत्राणिमादय: ।
चचाराव्याहतगतिर्लोकेषु पवनो यथा ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हज़ारों बाहों वाले क्षत्रियों के श्रेष्ठ हैहयराजा कार्तवीर्यार्जुन ने भगवान नारायण के अंश अवतार दत्तात्रेय की पूजा करके एक हजार भुजाएँ प्राप्त कीं। वह शत्रुओं द्वारा अपराजेय हो गया और उसे इंद्रियों की अव्याहत शक्ति, सुंदरता, प्रभाव, बल, यश और अणिमा, लघिमा जैसी आठ सिद्धियाँ प्राप्त हुईं। इस प्रकार पूर्ण ऐश्वर्यवान होकर वह सारे संसार में वायु की तरह बेजोड़ बनकर विचरण करने लगा।
 
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हज़ारों बाहों वाले क्षत्रियों के श्रेष्ठ हैहयराजा कार्तवीर्यार्जुन ने भगवान नारायण के अंश अवतार दत्तात्रेय की पूजा करके एक हजार भुजाएँ प्राप्त कीं। वह शत्रुओं द्वारा अपराजेय हो गया और उसे इंद्रियों की अव्याहत शक्ति, सुंदरता, प्रभाव, बल, यश और अणिमा, लघिमा जैसी आठ सिद्धियाँ प्राप्त हुईं। इस प्रकार पूर्ण ऐश्वर्यवान होकर वह सारे संसार में वायु की तरह बेजोड़ बनकर विचरण करने लगा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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