श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 15: भगवान् का योद्धा अवतार, परशुराम  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  9.15.12-13 
सा चाभूत् सुमहत्पुण्या कौशिकी लोकपावनी ।
रेणो: सुतां रेणुकां वै जमदग्निरुवाह याम् ॥ १२ ॥
तस्यां वै भार्गवऋषे: सुता वसुमदादय: ।
यवीयाञ्जज्ञ एतेषां राम इत्यभिविश्रुत: ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
बाद में सत्यवती समूचे विश्व को पवित्र करने वाली कौशिकी नामक पुण्य नदी बन गई और उनके बेटे जमदग्नि ने रेणु की बेटी रेणुका से विवाह किया। जमदग्नि के वीर्य से रेणुका के गर्भ से वसुमान आदि अनेक पुत्र हुए, जिनमें राम या परशुराम सबसे छोटा था।
 
बाद में सत्यवती समूचे विश्व को पवित्र करने वाली कौशिकी नामक पुण्य नदी बन गई और उनके बेटे जमदग्नि ने रेणु की बेटी रेणुका से विवाह किया। जमदग्नि के वीर्य से रेणुका के गर्भ से वसुमान आदि अनेक पुत्र हुए, जिनमें राम या परशुराम सबसे छोटा था।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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