श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 15: भगवान् का योद्धा अवतार, परशुराम  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  9.15.11 
प्रसादित: सत्यवत्या मैवं भूरिति भार्गव: ।
अथ तर्हि भवेत् पौत्रो जमदग्निस्ततोऽभवत् ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
किन्तु, सत्यवती ने मधुर वचनों के साथ ऋचीक मुनि को शांत किया और प्रार्थना की कि उनका बेटा एक क्रूर क्षत्रिय की तरह न हो। ऋचीक मुनि ने जवाब दिया, "तब आपका पोता एक क्षत्रिय स्वभाव वाला होगा।" इस तरह सत्यवती के पुत्र के रूप में जमदग्नि का जन्म हुआ।
 
किन्तु, सत्यवती ने मधुर वचनों के साथ ऋचीक मुनि को शांत किया और प्रार्थना की कि उनका बेटा एक क्रूर क्षत्रिय की तरह न हो। ऋचीक मुनि ने जवाब दिया, "तब आपका पोता एक क्षत्रिय स्वभाव वाला होगा।" इस तरह सत्यवती के पुत्र के रूप में जमदग्नि का जन्म हुआ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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