श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 15: भगवान् का योद्धा अवतार, परशुराम  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.15.10 
तद् विदित्वा मुनि: प्राह पत्नीं कष्टमकारषी: ।
घोरो दण्डधर: पुत्रो भ्राता ते ब्रह्मवित्तम: ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
जब ऋषि ऋचीक स्नान करके घर लौटे और उन्हें पता चला कि उनकी अनुपस्थिति में क्या घटा है तो उन्होंने अपनी पत्नी सत्यवती से कहा, "तुम्हारे कारण एक बड़ा अनर्थ हो गया है। तुम्हारा पुत्र एक क्रूर क्षत्रिय होगा, जो सबको सज़ा देगा और तुम्हारा भाई अध्यात्म विद्या का पंडित होगा।"
 
जब ऋषि ऋचीक स्नान करके घर लौटे और उन्हें पता चला कि उनकी अनुपस्थिति में क्या घटा है तो उन्होंने अपनी पत्नी सत्यवती से कहा, "तुम्हारे कारण एक बड़ा अनर्थ हो गया है। तुम्हारा पुत्र एक क्रूर क्षत्रिय होगा, जो सबको सज़ा देगा और तुम्हारा भाई अध्यात्म विद्या का पंडित होगा।"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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