रणको भविता तस्मात् सुरथस्तनयस्तत: ।
सुमित्रो नाम निष्ठान्त एते बार्हद्बलान्वया: ॥ १५ ॥
अनुवाद
क्षुद्रक से रणक, रणक से सुरथ, सुरथ से सुमित्र होगा, जिससे वंश का समापन होगा। यह बृहद्बल के वंश का वर्णन है।
Kshudraka's son will be Ranak, Ranak's son will be Surath, Surath's son will be Sumitra and thus the dynasty will come to an end. This is the description of Brihadbal's dynasty.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥