आसिक्तमार्गां गन्धोदै: करिणां मदशीकरै: ।
स्वामिनं प्राप्तमालोक्य मत्तां वा सुतरामिव ॥ २६ ॥
अनुवाद
श्री रामचन्द्र के राज में अयोध्या की गलियाँ सुगन्धित जल से तथा हाथियों द्वारा सूढ़ों से फेंके गये सुगन्धित तरल की बूंदों से सींची जाती थीं। जब शहर के लोग देखते कि स्वयं भगवान् शहर के मामलों की इतने आलिशान ढंग से देखभाल कर रहे हैं तो वे इस शानदार खूबी को बहुत सराहते थे।
During the reign of Lord Ramachandra, the streets of Ayodhya were sprinkled with perfumed water and drops of fragrant liquid thrown by elephants from their trunks. When the citizens saw the Lord Himself looking after the affairs of the city with such splendor, they praised this splendor very highly.
तात्पर्य
हमने भगवान रामचंद्र के शासनकाल में केवल राम-राज्य के वैभव के बारे में सुना है। अब, यहाँ भगवान के राज्य के वैभव का एक उदाहरण दिया गया है। अयोध्या की सड़कों को न केवल साफ किया गया, बल्कि इत्र के पानी और इत्रयुक्त शराब की बूंदों से भी छिड़का गया, जिन्हें हाथियों द्वारा उनकी सूंड के माध्यम से वितरित किया गया। छिड़काव मशीनों की कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि हाथी के पास अपनी सूंड के माध्यम से पानी को चूसने और फिर से एक बौछार में बाहर फेंकने की एक प्राकृतिक क्षमता होती है। हम इस एक उदाहरण से शहर के वैभव को समझ सकते हैं: यह वास्तव में सुगंधित पानी के साथ छिड़का गया था। इसके अलावा, नागरिकों को राज्य के मामलों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हुए भगवान को देखने का अवसर मिला। वह एक सोए हुए सम्राट नहीं थे, जैसा कि हम राजधानी के बाहर के मामलों को देखने के लिए अपने भाइयों को भेजने और सम्राट के आदेशों का पालन न करने वाले किसी को भी दंडित करने की उनकी गतिविधियों से समझ सकते हैं। इसे दिग्विजय कहा जाता है। नागरिकों को शांतिपूर्ण जीवन के लिए सभी सुविधाएँ दी जाती थीं, और उन्हें वर्णाश्रम के अनुसार उचित विशेषताओं के साथ भी योग्य बनाया गया था। जैसा कि हमने पिछले अध्याय से देखा है, वर्णाश्रम-गुणान्विताः: नागरिकों को वर्णाश्रम प्रणाली के अनुसार प्रशिक्षित किया गया था। पुरुषों का एक वर्ग ब्राह्मण, पुरुषों का एक वर्ग क्षत्रिय, एक वर्ग वैश्य और एक वर्ग शूद्र थे। इस वैज्ञानिक विभाजन के बिना, अच्छी नागरिकता का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। राजा, अपने कर्तव्य में उदार और पूर्ण होने के नाते, कई यज्ञों का प्रदर्शन करते थे और नागरिकों को अपने पुत्रों के रूप में मानते थे, और नागरिक, वर्णाश्रम प्रणाली में प्रशिक्षित होने के कारण, आज्ञाकारी और पूरी तरह से व्यवस्थित थे। संपूर्ण राजतंत्र इतना समृद्ध और शांतिपूर्ण था कि सरकार सुगंधित पानी के साथ सड़क पर छिड़काव करने में भी सक्षम थी, अन्य प्रबंधन की तो बात ही छोड़िए। चूंकि शहर को सुगंधित पानी से छिड़का गया था, इसलिए हम कल्पना कर सकते हैं कि यह अन्य मामलों में कितना समृद्ध था। भगवान रामचंद्र के शासनकाल में नागरिकों को खुशी क्यों नहीं मिलती?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥