| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 9: मुक्ति » अध्याय 10: परम भगवान् रामचन्द्र की लीलाएँ » श्लोक 51 |
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| | | | श्लोक 9.10.51  | त्रेतायां वर्तमानायां काल: कृतसमोऽभवत् ।
रामे राजनि धर्मज्ञे सर्वभूतसुखावहे ॥ ५१ ॥ | | | | | | अनुवाद | | त्रेतायुग में भगवान राम राजा बने थे, परन्तु उनकी सरकार की अच्छाई के कारण वह युग सत्ययुग के समान था। प्रत्येक व्यक्ति धार्मिक था और पूर्ण सुखी था। | | | | त्रेतायुग में भगवान राम राजा बने थे, परन्तु उनकी सरकार की अच्छाई के कारण वह युग सत्ययुग के समान था। प्रत्येक व्यक्ति धार्मिक था और पूर्ण सुखी था। | | ✨ ai-generated | | |
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