| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 9: मुक्ति » अध्याय 10: परम भगवान् रामचन्द्र की लीलाएँ » श्लोक 27 |
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| | | | श्लोक 9.10.27  | न वै वेद महाभाग भवान् कामवशं गत: ।
तेजोऽनुभावं सीताया येन नीतो दशामिमाम् ॥ २७ ॥ | | | | | | अनुवाद | | हे परम भाग्यशाली रावण, तू काम-वासना के वशीभूत हो गया था, इसीलिए तू सीताजी के प्रभाव (तेज) को नहीं समझ सका। अब भगवान रामचंद्र द्वारा मारे जाने के कारण सीताजी के शाप से तू इस दशा को प्राप्त हुआ है। | | | | हे परम भाग्यशाली रावण, तू काम-वासना के वशीभूत हो गया था, इसीलिए तू सीताजी के प्रभाव (तेज) को नहीं समझ सका। अब भगवान रामचंद्र द्वारा मारे जाने के कारण सीताजी के शाप से तू इस दशा को प्राप्त हुआ है। | | ✨ ai-generated | | |
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