श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 1: राजा सुद्युम्न का स्त्री बनना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  9.1.42 
तत: परिणते काले प्रतिष्ठानपति: प्रभु: ।
पुरूरवस उत्सृज्य गां पुत्राय गतो वनम् ॥ ४२ ॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद, जब समय अनुकूल हुआ, जब जगत के राजा सुद्युम्न पर्याप्त रूप से वृद्ध हो गए, तो उन्होंने अपना सारा राज्य अपने पुत्र पुरूरवा को दे दिया और स्वयं वन में चले गए।
 
Thereafter, when the king of the world Sudyumna became very old, he gave his entire kingdom to his son Pururava and himself went to the forest.
तात्पर्य
वैदिक प्रणाली के अनुसार, वर्ण और आश्रम में आने वाले को 50 वर्ष तक पहुँचने पर अपने पारिवारिक जीवन को त्याग देना चाहिए (पंचाशोर्ध्वं वनं व्रजेत्)। इस प्रकार सुद्युम्न ने राज्य त्याग कर और वन में जाकर अपने आध्यात्मिक जीवन को पूरा कर, वर्णाश्रम के निर्धारित विधानों का पालन किया।
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध नौ के अंतर्गत पहला अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)