ततो मनु: श्राद्धदेव: संज्ञायामास भारत ।
श्रद्धायां जनयामास दश पुत्रान् स आत्मवान् ॥ ११ ॥
इक्ष्वाकुनृगशर्यातिदिष्टधृष्टकरूषकान् ।
नरिष्यन्तं पृषध्रं च नभगं च कविं विभु: ॥ १२ ॥
अनुवाद
हे भारतवंश के श्रेष्ठ राजन्! विवस्वान को संज्ञा के गर्भ से श्राद्धदेव मनु की प्राप्ति हुई। श्राद्धदेव मनु ने अपनी इंद्रियों को जीत लिया था। उन्हें अपनी पत्नी श्रद्धा के गर्भ से दस पुत्रों की प्राप्ति हुई। इन पुत्रों के नाम थे- इक्ष्वाकु, नृग, शर्याति, दिष्ट, धृष्ट, करूषक, नरिष्यन्त, पृषध्र, नभग और कवि।
O best king of the Bharat dynasty, Vivasvan got Shraddhdev Manu from the womb of Sanjna. Shraddhdev Manu had conquered his senses. He got ten sons from the womb of his wife Shraddha. The names of these sons were- Ikshvaku, Nrig, Sharyati, Dist, Dhrisht, Karushak, Narishyant, Prishadhra, Nabhag and Kavi.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥