Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.5.40: सूर्यदेव के वक्षस्थल से लक्ष्मी, छाया से पितृलोकवासी, स्तनों से धर्म और पीठ से अधर्म की उत्पत्ति हुई। स्वर्गलोक उनके सिर से और अप्सराएँ उनके इन्द्रिय भोग से उत्पन्न हुईं। ऐसे परम शक्तिमान भगवान हम पर प्रसन्न हों। | bhagavat अध्याय 8.5: देवताओं द्वारा भगवान् से सुरक्षा याचना । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीर्वक्षस: पितरश्छाययासन्
धर्म: स्तनादितर: पृष्ठतोऽभूत् ।
द्यौर्यस्य शीर्ष्णोऽप्सरसो विहारात्
प्रसीदतां न: स महाविभूति: ॥ ४० ॥
अनुवाद
सूर्यदेव के वक्षस्थल से लक्ष्मी, छाया से पितृलोकवासी, स्तनों से धर्म और पीठ से अधर्म की उत्पत्ति हुई। स्वर्गलोक उनके सिर से और अप्सराएँ उनके इन्द्रिय भोग से उत्पन्न हुईं। ऐसे परम शक्तिमान भगवान हम पर प्रसन्न हों।
Lakshmi was born from his chest, the inhabitants of Pitriloka were born from his shadow, Dharma was born from his breast and Adharma was born from his back. The heavenly world was born from the top of his head and Apsaras were born from his sensual pleasures. May such a supremely powerful God be pleased with us!
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥