श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 24: भगवान् का मत्स्यावतार  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  8.24.58 
स तु सत्यव्रतो राजा ज्ञानविज्ञानसंयुत: ।
विष्णो: प्रसादात् कल्पेऽस्मिन्नासीद् वैवस्वतो मनु: ॥ ५८ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु की दया से राजा सत्यव्रत को वेदों का संपूर्ण ज्ञान प्राप्त हो गया और अब इस काल में उन्होंने सूर्यदेव के पुत्र वैवस्वत मनु के रूप में जन्म लिया है।
 
By the grace of Lord Vishnu, King Satyavrata got all the Vedic knowledge and in this period, he was now born as Vaivasvata Manu, the son of Sun God.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर अपने निर्णय में कहते हैं कि सत्यव्रत चाक्षुष-मन्वंतर में आए। जब चाक्षुष-मन्वंतर समाप्त हुआ, वैवस्वत मनु का काल आरंभ हुआ। भगवान विष्णु की कृपा से सत्यव्रत को मछली के दूसरे अवतार ने निर्देश दिए और इस तरह वह सभी आध्यात्मिक ज्ञान में प्रबुद्ध हुए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)