जब ब्रह्मा को यह ज्ञान हुआ कि अब भगवान आदि ति के गर्भ में हैं तब वो परमेश्वर के दिव्य नामों का जप करके उनको प्रार्थना करने लगे।
When Brahmā learned that the Lord was in the womb of Adīti, he began praising the Lord by reciting divine names.
तात्पर्य
भगवान सर्वव्यापी हैं (अण्डान्तर-स्था-परमाणु-चयान्तर-स्थम)। इसलिए जब कोई उनका पारलौकिक नाम जपता है- हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे/ हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे -तब भगवान स्वाभाविक रूप से ऐसे संकीर्तन से प्रसन्न होते हैं। ऐसा नहीं है कि भगवान सर्वत्र उपस्थित नहीं हैं; वे वहीं उपस्थित होते हैं। और जब कोई भक्त पारलौकिक नाम का उच्चारण करता है, तो यह कोई भौतिक ध्वनि नहीं होती है। इसलिए, भगवान स्वाभाविक रूप से प्रसन्न होते हैं। भक्त जानता है कि भगवान सर्वत्र उपस्थित हैं और उनका नाम जपने मात्र से ही उन्हें प्रसन्न किया जा सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥