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श्लोक 8.16.7  |
गृहेषु येष्वतिथयो नार्चिता: सलिलैरपि ।
यदि निर्यान्ति ते नूनं फेरुराजगृहोपमा: ॥ ७ ॥ |
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| अनुवाद |
| जिन घरों से मेहमान बिना एक गिलास पानी दिए वापस चले जाते हैं, वो घर खेतों के उन बिलों के समान होते हैं जहाँ सियार रहते हैं। |
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| जिन घरों से मेहमान बिना एक गिलास पानी दिए वापस चले जाते हैं, वो घर खेतों के उन बिलों के समान होते हैं जहाँ सियार रहते हैं। |
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