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श्लोक 8.16.32  |
नम: शिवाय रुद्राय नम: शक्तिधराय च ।
सर्वविद्याधिपतये भूतानां पतये नम: ॥ ३२ ॥ |
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| अनुवाद |
| हे शिव! हे रुद्र! मैं आपकी समस्त शक्तियों, समस्त ज्ञान और प्रत्येक जीव पर स्वामित्व के लिए सादर प्रणाम करता हूँ। |
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| हे शिव! हे रुद्र! मैं आपकी समस्त शक्तियों, समस्त ज्ञान और प्रत्येक जीव पर स्वामित्व के लिए सादर प्रणाम करता हूँ। |
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