श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 14: विश्व व्यवस्था की पद्धति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.14.6 
पालयन्ति प्रजापाला यावदन्तं विभागश: ।
यज्ञभागभुजो देवा ये च तत्रान्विताश्च तै: ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
विश्व के शासक, अर्थात् मनु के पुत्र तथा पौत्र, यज्ञों के फलों का भोग करने के लिए मनु के शासनकाल के अंत तक भगवान के आदेशों का पालन करते हैं। देवता लोग भी इन यज्ञों के फलों में अपना हिस्सा पाते हैं।
 
विश्व के शासक, अर्थात् मनु के पुत्र तथा पौत्र, यज्ञों के फलों का भोग करने के लिए मनु के शासनकाल के अंत तक भगवान के आदेशों का पालन करते हैं। देवता लोग भी इन यज्ञों के फलों में अपना हिस्सा पाते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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