Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.12.9: जो निर्विशेष मायावादी कहलाते हैं वे तुम्हें निर्विशेष ब्रह्म मानते हैं। मीमांसक विचारक तुम्हें धर्म के रूप में मानते हैं। सांख्य दार्शनिक तुम्हें ऐसा परम पुरुष मानते हैं, जो प्रकृति तथा पुरुष के परे है और देवताओं का भी नियंत्रक है। जो लोग पंचरात्र नामक भक्ति के नियमों के अनुयायी हैं, वे तुम्हें नौ शक्तियों से युक्त मानते हैं। तथा पतंजलि मुनि के अनुयायी जो पतंजल दार्शनिक कहलाते हैं, तुम्हें उस परम स्वतंत्र भगवान के रूप में मानते हैं जिसके न तो कोई तुल्य है और जिससे कोई श्रेष्ठ है। | bhagavat अध्याय 8.12: मोहिनी-मूर्ति अवतार पर शिवजी का मोहित होना । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो निर्विशेष मायावादी कहलाते हैं वे तुम्हें निर्विशेष ब्रह्म मानते हैं। मीमांसक विचारक तुम्हें धर्म के रूप में मानते हैं। सांख्य दार्शनिक तुम्हें ऐसा परम पुरुष मानते हैं, जो प्रकृति तथा पुरुष के परे है और देवताओं का भी नियंत्रक है। जो लोग पंचरात्र नामक भक्ति के नियमों के अनुयायी हैं, वे तुम्हें नौ शक्तियों से युक्त मानते हैं। तथा पतंजलि मुनि के अनुयायी जो पतंजल दार्शनिक कहलाते हैं, तुम्हें उस परम स्वतंत्र भगवान के रूप में मानते हैं जिसके न तो कोई तुल्य है और जिससे कोई श्रेष्ठ है।
Those who are called Nirvishesha Mayavadis regard You as the impersonal Brahman. The Mimansa philosophers regard You as Dharma. The Sankhya philosophers regard You as the Supreme Being who is beyond nature and man and is also the controller of the gods. Those who follow the rules of devotion called Pancharatra regard You as endowed with nine powers. And the followers of the sage Patanjali, who are called Patanjala philosophers, regard You as the Supreme Independent God who is neither equal nor superior to Him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥