श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 11: इन्द्र द्वारा असुरों का संहार  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  8.11.33 
तस्मादिन्द्रोऽबिभेच्छत्रोर्वज्र: प्रतिहतो यत: ।
किमिदं दैवयोगेन भूतं लोकविमोहनम् ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
जब इंद्र ने वज्र को दुश्मन से वापस आते देखा, तो वो बहुत डर गया। उसे शक होने लगा कि कहीं ये किसी दैवी शक्ति की वजह से तो नहीं हुआ।
 
When Indra saw the Vajra coming back from the enemy, he became very frightened. He started wondering if all this was done by some higher divine power.
तात्पर्य
इन्द्र का वज्र अजेय है, और इसलिए जब इन्द्र ने देखा कि वज्र नामुचि को कोई नुकसान पहुँचाए बिना ही वापस लौट आया है, तो निश्चित रूप से वह बहुत डर गया था|
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)