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bhagavat 8.1.6: हे कुरुश्रेष्ठ! तीसरे स्कंद में मैंने देवहूति के पुत्र कपिल जी के कार्यों का वर्णन किया है। अब मैं आकूति के पुत्र यज्ञपति जी के कार्यों का वर्णन करूँगा।   |   bhagavat अध्याय 8.1: ब्रह्माण्ड के प्रशासक मनु   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 1: ब्रह्माण्ड के प्रशासक मनु  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.1.6 
कृतं पुरा भगवत: कपिलस्यानुवर्णितम् ।
आख्यास्ये भगवान्यज्ञो यच्चकार कुरूद्वह ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! तीसरे स्कंद में मैंने देवहूति के पुत्र कपिल जी के कार्यों का वर्णन किया है। अब मैं आकूति के पुत्र यज्ञपति जी के कार्यों का वर्णन करूँगा।
 
O best of the Kurus! I have already described (in the third chapter) the activities of Kapil, the son of Devahūti. Now I shall describe the activities of Yajnapati, the son of Akuti.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)