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श्लोक 8.1.31  |
श्रीराजोवाच
बादरायण एतत् ते श्रोतुमिच्छामहे वयम् ।
हरिर्यथा गजपतिं ग्राहग्रस्तममूमुचत् ॥ ३१ ॥ |
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| अनुवाद |
| राजा परीक्षित ने कहा: हे बादरायणि प्रभु! हम आपसे विस्तार से सुनना चाहते हैं कि जब घड़ियाल द्वारा आक्रमण किये जाने पर हाथी के राजा(गजेन्द्र) को हरि ने किस प्रकार छुड़ाया था। |
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| राजा परीक्षित ने कहा: हे बादरायणि प्रभु! हम आपसे विस्तार से सुनना चाहते हैं कि जब घड़ियाल द्वारा आक्रमण किये जाने पर हाथी के राजा(गजेन्द्र) को हरि ने किस प्रकार छुड़ाया था। |
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