श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 1: ब्रह्माण्ड के प्रशासक मनु  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.1.31 
श्रीराजोवाच
बादरायण एतत् ते श्रोतुमिच्छामहे वयम् ।
हरिर्यथा गजपतिं ग्राहग्रस्तममूमुचत् ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
राजा परीक्षित ने कहा: हे बादरायणि प्रभु! हम आपसे विस्तार से सुनना चाहते हैं कि जब घड़ियाल द्वारा आक्रमण किये जाने पर हाथी के राजा(गजेन्द्र) को हरि ने किस प्रकार छुड़ाया था।
 
राजा परीक्षित ने कहा: हे बादरायणि प्रभु! हम आपसे विस्तार से सुनना चाहते हैं कि जब घड़ियाल द्वारा आक्रमण किये जाने पर हाथी के राजा(गजेन्द्र) को हरि ने किस प्रकार छुड़ाया था।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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