श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 1: ब्रह्माण्ड के प्रशासक मनु  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.1.19 
स्वारोचिषो द्वितीयस्तु मनुरग्ने: सुतोऽभवत् ।
द्युमत्सुषेणरोचिष्मत्प्रमुखास्तस्य चात्मजा: ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
अग्नि का पुत्र स्वारोचिष दूसरा मनु हुआ। उसके अनेक पुत्रों में से द्युमत, सुषेण तथा रोचिष्मत् प्रमुख थे।
 
Agni's son Swarochisha became the second Manu. Among his many sons, Dyumat, Sushen and Rochishmat were prominent.
तात्पर्य
हिन्दी पाठ:

मान्वन्तरम् मनुर देवा

मनु पुत्राः सुरेश्वरः

ऋषयों अम्शावताराश्च

हरेः षड् विधं उच्यते

परमेश्वर के कई अवतार हैं। मनु, मनु पुत्रा (मनु के पुत्र), स्वर्गीय ग्रहों के राजा और सात महान ऋषि सभी परमेश्वर के आंशिक अवतार हैं। स्वंयभुव मनु के शासनकाल के दौरान स्वयं मनु, उनके पुत्र प्रियव्रत और उत्तमपाद, दक्ष द्वारा निर्मित देवता और मरीच जैसे ऋषि सभी भगवान के आंशिक अवतार थे। उस समय, यज्ञ के रूप में भगवान के अवतार ने स्वर्गीय ग्रहों पर शासन करने का कार्यभार संभाला था। अगला मनु स्वारोचिष था। मनु, ऋषियों और देवताओं का वर्णन आगे के ग्यारह छंदों में किया गया है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)