श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 1: ब्रह्माण्ड के प्रशासक मनु  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.1.1 
श्रीराजोवाच
स्वायम्भुवस्येह गुरो वंशोऽयं विस्तराच्छ्रुत: ।
यत्र विश्वसृजां सर्गो मनूनन्यान्वदस्व न: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
राजा परीक्षित ने कहा : हे प्रभु! हे गुरुवर! अब मैंने आपसे स्वायंभुव मनु के वंश के विषय में अच्छी तरह से सुना। लेकिन अन्य मनु भी हैं; इसलिए मैं उनके वंशों के बारे में जानना चाहता हूँ। कृपया उनका वर्णन करें।
 
राजा परीक्षित ने कहा : हे प्रभु! हे गुरुवर! अब मैंने आपसे स्वायंभुव मनु के वंश के विषय में अच्छी तरह से सुना। लेकिन अन्य मनु भी हैं; इसलिए मैं उनके वंशों के बारे में जानना चाहता हूँ। कृपया उनका वर्णन करें।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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