श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 6: प्रह्लाद द्वारा अपने असुर सहपाठियों को उपदेश  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.6.28 
श्रुतमेतन्मया पूर्वं ज्ञानं विज्ञानसंयुतम् ।
धर्मं भागवतं शुद्धं नारदाद्देवदर्शनात् ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लाद महाराज ने कहा: मैंने यह ज्ञान परम संत नारद से प्राप्त किया है, जो सदैव भक्ति में तल्लीन रहते हैं। यह ज्ञान, जिसे भागवत धर्म कहा जाता है, अत्यंत वैज्ञानिक है। यह तर्क और दर्शन पर आधारित है और सभी भौतिक दोषों से मुक्त है।
 
प्रह्लाद महाराज ने कहा: मैंने यह ज्ञान परम संत नारद से प्राप्त किया है, जो सदैव भक्ति में तल्लीन रहते हैं। यह ज्ञान, जिसे भागवत धर्म कहा जाता है, अत्यंत वैज्ञानिक है। यह तर्क और दर्शन पर आधारित है और सभी भौतिक दोषों से मुक्त है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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