श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 6: प्रह्लाद द्वारा अपने असुर सहपाठियों को उपदेश  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.6.24 
तस्मात्सर्वेषु भूतेषु दयां कुरुत सौहृदम् ।
भावमासुरमुन्मुच्य यया तुष्यत्यधोक्षज: ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
इसलिए, हे असुरों से जन्मे मेरे प्रिय युवा मित्रो, कृपया इस प्रकार कार्य करें कि प्रत्यक्ष भौतिक ज्ञान से परे भगवान् आप पर प्रसन्न हों। अपनी राक्षसी प्रकृति का त्याग करें और शत्रुता या द्वैत के बिना कर्म करें। सभी जीवों पर भक्ति प्रकाश जगाकर उन पर दयाभाव दिखाएँ और इस प्रकार उनके शुभचिंतक बनें।
 
इसलिए, हे असुरों से जन्मे मेरे प्रिय युवा मित्रो, कृपया इस प्रकार कार्य करें कि प्रत्यक्ष भौतिक ज्ञान से परे भगवान् आप पर प्रसन्न हों। अपनी राक्षसी प्रकृति का त्याग करें और शत्रुता या द्वैत के बिना कर्म करें। सभी जीवों पर भक्ति प्रकाश जगाकर उन पर दयाभाव दिखाएँ और इस प्रकार उनके शुभचिंतक बनें।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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