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श्लोक 7.5.36  |
विष्णोर्वा साध्वसौ किं नु करिष्यत्यसमञ्जस: ।
सौहृदं दुस्त्यजं पित्रोरहाद्य: पञ्चहायन: ॥ ३६ ॥ |
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| अनुवाद |
| यद्यपि प्रह्लाद मात्र पाँच वर्ष का है, किन्तु इतनी कम अवस्था में ही उसके द्वारा माता-पिता के स्नेह-सम्बन्धों का परित्याग कर लेना विश्वास के योग्य नहीं है। अतः इस बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता कि वह विष्णु के प्रति उचित व्यवहार करेगा। |
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| यद्यपि प्रह्लाद मात्र पाँच वर्ष का है, किन्तु इतनी कम अवस्था में ही उसके द्वारा माता-पिता के स्नेह-सम्बन्धों का परित्याग कर लेना विश्वास के योग्य नहीं है। अतः इस बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता कि वह विष्णु के प्रति उचित व्यवहार करेगा। |
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