Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 7.14.6: मानव समाज में बुद्धिमान मनुष्य को अपने काम-काज और गतिविधियों को आसान और सहज रखना चाहिए। अगर उसके दोस्त, बच्चे, माता-पिता, भाई या कोई और कुछ सुझाव देता है, तो उसे मानते हुए यह कहना चाहिए कि "हाँ, यह ठीक है" लेकिन अंदर से उसे यह पक्का करना चाहिए कि वो अपने जीवन को इतना जटिल और भारी न बनाए जिससे जीवन का असली उद्देश्य पूरा न हो पाए।   |   bhagavat अध्याय 7.14: आदर्श पारिवारिक जीवन   ।   bhagavat स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 14: आदर्श पारिवारिक जीवन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.14.6 
ज्ञातय: पितरौ पुत्रा भ्रातर: सुहृदोऽपरे ।
यद्वदन्ति यदिच्छन्ति चानुमोदेत निर्मम: ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
मानव समाज में बुद्धिमान मनुष्य को अपने काम-काज और गतिविधियों को आसान और सहज रखना चाहिए। अगर उसके दोस्त, बच्चे, माता-पिता, भाई या कोई और कुछ सुझाव देता है, तो उसे मानते हुए यह कहना चाहिए कि "हाँ, यह ठीक है" लेकिन अंदर से उसे यह पक्का करना चाहिए कि वो अपने जीवन को इतना जटिल और भारी न बनाए जिससे जीवन का असली उद्देश्य पूरा न हो पाए।
 
In human society, a wise man should plan his activities very simply. If his friend, son, parents, brother or anyone else suggests something, he should accept it superficially and say “yes, this is right” but from within he should be determined not to make his life so difficult that the purpose of life cannot be fulfilled.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)