हे प्रभु, जब कोई मनुष्य अपने मन की सभी भौतिक इच्छाओं को त्यागने में सक्षम हो जाता है, तो वह तुम्हारे समान ही धन-संपत्ति और ऐश्वर्य का अधिकारी बन जाता है।
O Lord, when a person is able to remove all material desires from his mind, he becomes worthy of wealth and prosperity like You.
तात्पर्य
नास्तिक लोग कभी-कभी एक भक्त की आलोचना इस तरह करके करते हैं, "यदि आप भगवान से कोई वरदान नहीं लेना चाहते हैं और यदि भगवान का सेवक स्वयं भगवान के समान ही सम्पन्न है तो आप भगवान के सेवक के रूप में कार्य करने के वरदान की मांग क्यों करते हैं?" श्रीधर स्वामी भगवान का भक्त होना भगवत्-समान ऐश्वर्य की कामना करना है। भगवत्ता, भगवान के समान श्रेष्ठ बनने का अर्थ उनसे एक होना या उनके समान होना नहीं है, यद्यपि आध्यात्मिक जगत में सेवक अपने स्वामी के समान ही सम्पन्न होता है। भगवान का सेवक एक सेवक, मित्र, पिता, माता या पति या प्रेमी के रूप में भगवान की सेवा में संलग्न होता है, जिनमें से सभी भगवान के समान ही संपन्न होते हैं। यही अचिंत्य-भेद-अभेद-तत्व है। स्वामी और सेवक अलग-अलग हैं, फिर भी ऐश्वर्य में समान हैं। यही भगवान से एक होने और उनसे अलग होने का एक साथ अर्थ है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥