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श्लोक 7.10.61  |
विलोक्य भग्नसङ्कल्पं विमनस्कं वृषध्वजम् ।
तदायं भगवान्विष्णुस्तत्रोपायमकल्पयत् ॥ ६१ ॥ |
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| अनुवाद |
| महादेवजी को अत्यंत दुःखी और निराश देखकर भगवान विष्णु ने मनन किया कि मय दानव के कारण उत्पन्न इस विपत्ति को कैसे रोका जाए। |
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| महादेवजी को अत्यंत दुःखी और निराश देखकर भगवान विष्णु ने मनन किया कि मय दानव के कारण उत्पन्न इस विपत्ति को कैसे रोका जाए। |
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