श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 10: भक्त शिरोमणि प्रह्लाद  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.10.35 
एवं च पार्षदौ विष्णो: पुत्रत्वं प्रापितौ दिते: ।
हृदि स्थितेन हरिणा वैरभावेन तौ हतौ ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान विष्णु के वे दो साथी, जो दिति के पुत्र, हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप बने थे, मार दिए गए। वे मृत्युलोक में भ्रमवश यह सोचने लगे थे कि परमात्मा, जो हर किसी के दिल में निवास करते हैं, उनके शत्रु हैं।
 
इस प्रकार भगवान विष्णु के वे दो साथी, जो दिति के पुत्र, हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप बने थे, मार दिए गए। वे मृत्युलोक में भ्रमवश यह सोचने लगे थे कि परमात्मा, जो हर किसी के दिल में निवास करते हैं, उनके शत्रु हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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