सर्वात्मना न हिंसन्ति भूतग्रामेषु किञ्चन ।
उच्चावचेषु दैत्येन्द्र मद्भावविगतस्पृहा: ॥ २० ॥
अनुवाद
हे दैत्यराज प्रह्लाद, मेरी भक्तिभाव में लगा रहनेवाला मेरा भक्त ऊँचे और नीच जीवों में भेदभाव नहीं करता। सभी प्रकार से वह किसी से ईर्ष्या नहीं करता।
O demon king Prahlada, being absorbed in my devotion, my devotee does not discriminate between high and low beings. He is not jealous of anyone in any way.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥