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श्लोक 6.9.8  |
तुर्यं छेदविरोहेण वरेण जगृहुर्द्रुमा: ।
तेषां निर्यासरूपेण ब्रह्महत्या प्रदृश्यते ॥ ८ ॥ |
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| अनुवाद |
| ब्रह्महत्या के पापफल के चतुर्थांश को अपने ऊपर लेने के कारण पेड़ों के रस में पापफल दिखाई देते हैं [और इसलिए इन्हें पीना वर्जित है]। इसके बदले में इंद्र से पेड़ों ने यह वरदान लिया था कि काटे जाने पर भी उनकी शाखाएँ फिर से उग आयेंगी। |
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| ब्रह्महत्या के पापफल के चतुर्थांश को अपने ऊपर लेने के कारण पेड़ों के रस में पापफल दिखाई देते हैं [और इसलिए इन्हें पीना वर्जित है]। इसके बदले में इंद्र से पेड़ों ने यह वरदान लिया था कि काटे जाने पर भी उनकी शाखाएँ फिर से उग आयेंगी। |
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