श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 8: नारायण-कवच  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.8.26 
त्वं तिग्मधारासिवरारिसैन्य-
मीशप्रयुक्तो मम छिन्धि छिन्धि ।
चक्षूंषि चर्मञ्छतचन्द्र छादय
द्विषामघोनां हर पापचक्षुषाम् ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
हे तेज धार वाली तलवार, तुम श्रीभगवान के हाथों में हो। कृपया मेरे शत्रुओं के सिपाहियों को टुकड़े-टुकड़े कर दो; कृपा करके उन्हें टुकड़े-टुकड़े कर दो। हे सैकड़ों चन्द्रमण्डलों से अंकित चमकीली ढाल! पापी शत्रुओं की आँखें ढँक दो और उनकी पापी आँखें निकाल लो।
 
O sharpest of all swords! You are used by the Lord. Kindly cut my enemy's soldiers into pieces; please cut them into pieces. O effulgent shield marked with circles like hundreds of moons! Cover the eyes of the sinful enemies and take out their sinful eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)