श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 7: इन्द्र द्वारा गुरु बृहस्पति का अपमान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.7.9 
ततो निर्गत्य सहसा कविराङ्गिरस: प्रभु: ।
आययौ स्वगृहं तूष्णीं विद्वान्श्रीमदविक्रियाम् ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
बृहस्पति जी को सब कुछ पता था कि आगे क्या होने जा रहा है। इंद्र द्वारा सभी शिष्टाचारों का उल्लंघन देखकर वे अच्छी तरह से समझ गये थे कि इंद्र ऐश्वर्य के नशे में चूर हो गये हैं। वे चाहें तो इंद्र को शाप दे सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। वे उस सभा से निकलकर चुपचाप अपने घर चले आये।
 
बृहस्पति जी को सब कुछ पता था कि आगे क्या होने जा रहा है। इंद्र द्वारा सभी शिष्टाचारों का उल्लंघन देखकर वे अच्छी तरह से समझ गये थे कि इंद्र ऐश्वर्य के नशे में चूर हो गये हैं। वे चाहें तो इंद्र को शाप दे सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। वे उस सभा से निकलकर चुपचाप अपने घर चले आये।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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