श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 7: इन्द्र द्वारा गुरु बृहस्पति का अपमान  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.7.39 
सुरद्विषां श्रियं गुप्तामौशनस्यापि विद्यया ।
आच्छिद्यादान्महेन्द्राय वैष्णव्या विद्यया विभु: ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि शुक्राचार्य ने अपनी बुद्धिमत्ता और कुशल नीतिओं से देवताओं के शत्रुओं के तौर पर प्रसिद्ध असुरों के वैभव को बचाए रखा, परन्तु अत्यंत शक्तिशाली विश्वरूप ने नारायण कवच नामक एक सुरक्षात्मक मंत्र की रचना की। इस प्रभावशाली मंत्र के माध्यम से उन्होंने असुरों के वैभव को छीनकर स्वर्ग के राजा इंद्र को सौंप दिया।
 
यद्यपि शुक्राचार्य ने अपनी बुद्धिमत्ता और कुशल नीतिओं से देवताओं के शत्रुओं के तौर पर प्रसिद्ध असुरों के वैभव को बचाए रखा, परन्तु अत्यंत शक्तिशाली विश्वरूप ने नारायण कवच नामक एक सुरक्षात्मक मंत्र की रचना की। इस प्रभावशाली मंत्र के माध्यम से उन्होंने असुरों के वैभव को छीनकर स्वर्ग के राजा इंद्र को सौंप दिया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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