श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 7: इन्द्र द्वारा गुरु बृहस्पति का अपमान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.7.18 
तच्छ्रुत्वैवासुरा: सर्व आश्रित्यौशनसं मतम् ।
देवान् प्रत्युद्यमं चक्रुर्दुर्मदा आततायिन: ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
असुर, इंद्र की दयनीय स्थिति के बारे में जानकर, अपने गुरु शुक्राचार्य के आदेश पर हथियारों से लैस हो गए और देवताओं के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।
 
असुर, इंद्र की दयनीय स्थिति के बारे में जानकर, अपने गुरु शुक्राचार्य के आदेश पर हथियारों से लैस हो गए और देवताओं के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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