श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 5: प्रजापति दक्ष द्वारा नारद मुनि को शाप  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.5.35 
चुक्रोध नारदायासौ पुत्रशोकविमूर्च्छित: ।
देवर्षिमुपलभ्याह रोषाद्विस्फुरिताधर: ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
जब दक्ष ने सुना कि सवलाश्व भी नारद के उपदेशानुसार भक्ति में लगकर इस संसार से चले गये हैं तो वे नारद पर बहुत क्रुद्ध हुए। वे उनके विरह में बेहोश से हो गये। जब दक्ष ने नारद से भेंट की तो क्रोध के कारण उनके होठ काँपने लगे और वे इस प्रकार बोले।
 
जब दक्ष ने सुना कि सवलाश्व भी नारद के उपदेशानुसार भक्ति में लगकर इस संसार से चले गये हैं तो वे नारद पर बहुत क्रुद्ध हुए। वे उनके विरह में बेहोश से हो गये। जब दक्ष ने नारद से भेंट की तो क्रोध के कारण उनके होठ काँपने लगे और वे इस प्रकार बोले।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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