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श्लोक 6.5.35  |
चुक्रोध नारदायासौ पुत्रशोकविमूर्च्छित: ।
देवर्षिमुपलभ्याह रोषाद्विस्फुरिताधर: ॥ ३५ ॥ |
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| अनुवाद |
| जब दक्ष ने सुना कि सवलाश्व भी नारद के उपदेशानुसार भक्ति में लगकर इस संसार से चले गये हैं तो वे नारद पर बहुत क्रुद्ध हुए। वे उनके विरह में बेहोश से हो गये। जब दक्ष ने नारद से भेंट की तो क्रोध के कारण उनके होठ काँपने लगे और वे इस प्रकार बोले। |
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| जब दक्ष ने सुना कि सवलाश्व भी नारद के उपदेशानुसार भक्ति में लगकर इस संसार से चले गये हैं तो वे नारद पर बहुत क्रुद्ध हुए। वे उनके विरह में बेहोश से हो गये। जब दक्ष ने नारद से भेंट की तो क्रोध के कारण उनके होठ काँपने लगे और वे इस प्रकार बोले। |
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