श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 3: यमराज द्वारा अपने दूतों को आदेश  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.3.35 
इतिहासमिमं गुह्यं भगवान् कुम्भसम्भव: ।
कथयामास मलय आसीनो हरिमर्चयन् ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
जब विशाल ऋषि अगस्त्य, कुम्भ के पुत्र, मलय पर्वत पर निवास कर रहे थे और पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् की पूजा कर रहे थे, तब मैंने उनके पास जाकर उनसे यह गुह्य इतिहास जाना।
 
जब विशाल ऋषि अगस्त्य, कुम्भ के पुत्र, मलय पर्वत पर निवास कर रहे थे और पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् की पूजा कर रहे थे, तब मैंने उनके पास जाकर उनसे यह गुह्य इतिहास जाना।
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध छह के अंतर्गत तीसरा अध्याय समाप्त होता है ।
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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