श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 19: पुंसवन व्रत का अनुष्ठान  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.19.15 
इत्यभिष्टूय वरदं श्रीनिवासं श्रिया सह ।
तन्नि:सार्योपहरणं दत्त्वाचमनमर्चयेत् ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
श्रीशुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा—इस प्रकार श्रीनिवास भगवान विष्णु जी की पूजा लक्ष्मी जी के साथ ऊपर बताये गए विधि से स्तुति करके करें। फिर पूजा की सभी सामग्री हटाकर उनका हाथ-मुँह धुलाने के लिए जल अर्पित करें और फिर दोबारा उनकी पूजा करें।
 
श्रीशुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा—इस प्रकार श्रीनिवास भगवान विष्णु जी की पूजा लक्ष्मी जी के साथ ऊपर बताये गए विधि से स्तुति करके करें। फिर पूजा की सभी सामग्री हटाकर उनका हाथ-मुँह धुलाने के लिए जल अर्पित करें और फिर दोबारा उनकी पूजा करें।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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