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श्लोक 6.19.15  |
इत्यभिष्टूय वरदं श्रीनिवासं श्रिया सह ।
तन्नि:सार्योपहरणं दत्त्वाचमनमर्चयेत् ॥ १५ ॥ |
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| अनुवाद |
| श्रीशुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा—इस प्रकार श्रीनिवास भगवान विष्णु जी की पूजा लक्ष्मी जी के साथ ऊपर बताये गए विधि से स्तुति करके करें। फिर पूजा की सभी सामग्री हटाकर उनका हाथ-मुँह धुलाने के लिए जल अर्पित करें और फिर दोबारा उनकी पूजा करें। |
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| श्रीशुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा—इस प्रकार श्रीनिवास भगवान विष्णु जी की पूजा लक्ष्मी जी के साथ ऊपर बताये गए विधि से स्तुति करके करें। फिर पूजा की सभी सामग्री हटाकर उनका हाथ-मुँह धुलाने के लिए जल अर्पित करें और फिर दोबारा उनकी पूजा करें। |
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